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प्रस्तावना

एमडीएल देश का अग्रणी रक्षा शिपयार्ड है और यह लगभग दो सदियों से भी अधिक समय से भारत के समुद्री मामलों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं। भारत सरकार द्वारा सन् 1960 में एमडीएल का अधिग्रहण एक स्वदेशीकृत रणनीतिक जहाज निर्माण का राष्ट्रीय दृष्टिकोण रखते हुए किया गया। एमडीएल ने बड़े पैमाने पर युद्धपोतों, पण्डुब्बियों और विभिन्न सहायक तथा वाणिज्यिक जलयानों का निर्माण और सुपुर्दगी किया है। पहला स्वदेशी युद्धपोत आईएनएस नीलगिरी का निर्माण एमडीएल द्वारा किया गया और वर्ष 1972 में भारतीय नौसेना को सुपुर्द किया गया। तत्पश्चात, एमडीएल का निरंतर प्रयास रहा है कि वह जहाजों और पण्डुब्बियों के निर्माण में स्वदेशी सामग्री का प्रतिशत उत्तरोत्तर वृद्धि करता रहे। मई 2015 से एमडीएल में मेक इन इंडिया एकक – कार्य कर रहा है और इसके आगे स्वदेशीकरण के प्रयासों को अधिक मजबूत करने के लिए एक समर्पित स्वदेशीकरण विभाग की स्थापना की गई है।

युद्धपोत/पण्डुब्बियों के रूपांकन और निर्माण का कार्य बहुत ही जटिल और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होता है क्योंकि युद्धपोत/ पनडुब्बी में बड़ी मात्रा में अभियांत्रिकी, विधुतीय, इलेक्ट्रानिक और पोतकाय एवं आयुध प्रणाली में विविध प्रकार की तकनीकी कौशल प्रौद्योगिकी शामिल होती है। अनेक मुख्य अभियांत्रिकी, इलेक्ट्रानिक और आयुध प्रणालियाँ आज भी आयात की जाती हैं क्योंकि इनका निर्माण भारत में नहीं किया जाता है। आयातित प्रणालियाँ न केवल बहुत महंगी हैं अपितु असंतोषजनक लाईफटाइम सपोर्ट की प्रतिकूल परिस्थितियों से जुड़ी हुई हैं जो पोतों/पण्डुब्बियों की मारक क्षमता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती हैं। इसके अलावा, विशेष रूप से युद्ध के दौरान इनका समय से उपलब्ध होना, संतोषजनक रूप से सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है। ऐसी अति निर्भरता विभिन्न प्रणालियों की उच्च लागत वाली प्राप्तियाँ विदेशी कंपनियों से जुड़ी हुई है। इसका निराकरण केवल स्वदेशी रूपांकन, विकास और निर्माण उद्योग में प्रोत्साहन देकर ही किया जा सकता है। “मेक इन इंडिया” भारत सरकार का एक लक्ष्य है जो भारत को ‘निर्माण केंद्र’ के रूप में तब्दील कर सकता है और काफी हद तक इससे सैन्य मामलों में हम आत्म निर्भर हो सकते हैं।

एमडीएल युद्धपोत /पण्डुब्बियों का निर्माण ग्राहक द्वारा प्रदान किए गए विशेष विवरण/मांग के अनुसार करती है और विभिन्न उपकरणों/ प्रणालियों को संग्रहीत करके युद्ध के लायक बनती है। कुछ उपकरण प्रत्यक्ष रूप से युद्धपोतों पर लगाने के लिए ग्राहक द्वारा प्रदान किए जाते हैं और शिपयार्ड में सुसज्जित और एकीकरण के लिए भेजे जाते हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में अभियांत्रिकी, विधुतीय, इलेक्ट्रानिक और आयुध प्रणालियाँ शिपयार्ड में ग्राहकों द्वारा निर्दिष्ट विक्रेताओं(वेंडरों) से एकल निविदा/ सीमित निविदा जांच के आधार पर प्राप्त की जाती हैं जिससे कि ग्राहक द्वारा निर्दिष्ट तकनीकी और गुणवत्ता शर्तों को पूरा किया जाता है। शिपयार्ड में यह सहूलियत नहीं है कि शेष सामग्री/ उपकरण की प्राप्ति विभिन्न विक्रेताओं से प्रतियोगिता के आधार पर करे जिससे कि ग्राहक द्वारा निर्दिष्ट तकनीकी और गुणवत्ता शर्तों को पूरा किया जा सके। फिर भी यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अधिकतर उपकरण ग्राहक द्वारा नामांकित किए जाते हैं जो युद्धपोतों/ पनडुब्बी में निर्धारित लक्ष्य के अपेक्षित कार्य पर आधारित होते हैं।

पृष्ट अपडेड की अंतिम तिथि ११/०६/२०१४

समवाय कार्मिक

  • माझगाव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड,
    डॉकयार्ड रोड, माझगांव,
    मुंबई - ४०० ०१०, भारत
  • दूरभाष सं. :
    बोर्ड: २३७६ २०००, २३७६ ३०००,
    2376 4000

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